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भोपाल में नवबहार सब्जी मंडी में रोज की तरह सब्जी नहीं पहुंची और सब्जी की ज्यादातर दुकानें भी बंद रहीं

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किसानों ने भले ही शांतिपूर्वक गांव बंद (किसान आंदोलन) का ऐलान किया हो, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिले इनपुट किसान आंदोलन के हिंसक होने की संभावना को देखते हुए पुलिस भोपाल समेत आसपास के जिलों में विशेष सतर्कता बरत रही है। पुलिस-प्रशासन के साथ सरकार की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। शुक्रवार को सुबह से बंद का मिला जुला असर दिख रहा है। भोपाल में नवबहार सब्जी मंडी में रोज की तरह सब्जी नहीं पहुंची और सब्जी की ज्यादातर दुकानें भी बंद रहीं।

– दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन किसानों को मनाने की कोशिशों में भी जुटा है। पुलिस ने किसानों से भ्रामक अफवाहों पर गौर नहीं करने का आग्रह किया है। आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ के मंदसौर और नीमच में देखने को मिल रहा है।

दिखा आंदोलन का असर

– किसान आंदोलन का असर धीरे-धीरे छोटे-बड़े शहरों की मंडियों में दिखने लगा है। अपनी पूर्व घोषणा के मुताबिक किसानों ने कहा था कि वे अपनी उपज मंडियों में नहीं भेजेंगे, ऐसे में मंडियों में शुक्रवार को सामान्य से कम ही भीड़ नजर आई। कई मंडियों में किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचे और व्यापारियों ने पुराना स्टॉक किया माल ही बेचा। भोपाल की प्रमुख मंडियों में लोगों तक पुराना माल ही पहुंच रहा है।

– हालांकि लोगों ने एक दिन पहले से सब्जी और अन्य जरुरी सामानों का स्टॉक करना शुरू कर दिया था लेकिन आज भी कई लोग जब मंडियों में पहुंचे तो उन्हें ताजा माल नहीं मिला।

होशंगाबाद में नहीं पहुंचे किसान
– होशंगाबाद में भी सब्जी मंडी में माल नहीं आया और 2 दिन पुरानी सब्जियां बिकीं। सब्जी मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष आमीन राइन के मुताबिक बिक्री में 30 फीसदी गिरावट आई है और सब्जियां रोड़ पर ही बिक रही हैं। मंडियों में ज्यादा किसान नहीं पहुंचे हैं। दूध की सप्लाई पर फिलहाल असर नहीं है। बाजार के जानकारों के मुताबिक हड़ताल का असर 3 जून से नजर आएगा।
– इटारसी मंडी में पुलिस ने किसानों से संवाद किया। एसपी मंडी क्षेत्र का जायजा ले रहे हैं। जगह-जगह पुलिस बल तैनात है। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी रात 3 बजे से लगाई गई है।

विदिशा में असर
– विदिशा में किसानों के बंद आंदोलन का खासा असर दिखाई दे रहा है। शहर के बाहरी इलाकों में बंद आंदोलन कर रहे किसान सुबह से ही जमा हो गए थे और शहर में आने वाले दूध बेचने वालों को वापस गांव लौटा रहे थे। इस दौरान मामूली विवाद की स्थिति भी बनीं। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। बंद आंदोलन से विदिशा में दूध की सप्लाई प्रभावित हुई है और कई जगह दूध की सप्लाई नहीं हो पाई।

सिंधिया ने गुना में आंदोलन को सही ठहराया
– गुना में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जनसभा कर किसान आंदोलन को सही ठहराया है। जबकि भाजपा नेता अनूप मिश्रा ने किसान आंदोलन को कांग्रेस के अरुण यादव, सिंधिया, कमलनाथ व दिग्विजय सिंह की गुटबाजी का कारण बताया। सीहोर में किसान नेताओं ने घर-घर जाकर पर्चे बांटे जा रहे हैं।

– नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर शुक्रवार को किसानों के आंदोलन के समर्थन में सभा करने जा रही हैं। सागर में किसान संगठनों का कोई नेता अभी सामने नहीं आया है। होशंगाबाद और रायसेन जिले में भारतीय किसान मजदूर संघ आंदोलन को लेकर सक्रिय है।

ग्वालियर में आंदोलन की हलचल नहीं, पुलिस-प्रशासन तैयार
– ग्वालियर-चंबल अंचल के जिलों का प्रशासन तो पूरी तरह तैयार है लेकिन किसानों में इस आंदोलन को लेकर 24 घंटे पहले तक कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। शिवपुरी में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष बंटी यादव का कहना है कि जिले में किसानों का कोई आंदोलन संगठन की ओर से नहीं किया जा रहा है।

जबलपुर क्षेत्र में प्रशासन अलर्ट
– महाकौशल-विंध्य क्षेत्र में तैयारियों को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं देखने मिली है। हालांकि प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है और वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। उमरिया, कटनी, सतना, मंडला, सिंगरौली, रीवा, बालाघाट में किसान संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी नहीं दी है। डिंडौरी में कांग्रेस किसान संघ समनापुर में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है। प्रशासन गांव-गांव जाकर किसानों की बैठक कर उन्हें समझाइश दे रहा है।

आंदोलन हिंसक होने का इनपुट
– बता दें कि प्रदेशभर में एक जून हो प्रस्तावित किसान आंदोलन में हिंसा होने का इनपुट भी इंटेलीजेंस को मिला है। इंटेलीजेंस आईजी मकरंद देउस्कर का कहना है कि किसान आंदोलन करने वाले सभी संगठन शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की बात कहते हैं, लेकिन आंदोलन के समय जमीनीं हकीकत दूसरी रहती है। इसलिए पुलिस मुख्यालय ने अपने स्तर पर तैयारियां करने के साथ जिलों के एसपी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

कमलनाथ ने की कड़ी आलोचना

– कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट करके शिवराज सरकार की तीखी आलोचना की है। उन्होंने लिखा, ” मध्य प्रदेश समेत पूरे देश का किसान आंदोलन कर रहा है, एक तरफ सरकार के किसान हितैषी होने के झूठे दावे और दूसरी तरफ खेत, खलिहान और मंडियों में दम तोड़ते किसानों की खबरें।”
‘शिवराज’ या “शवराज”..?
‘किसान’ या “मिटता निशान”..?
‘मध्यप्रदेश’ या “मृत्युप्रदेश”..?

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