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मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बयान दिया

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “हम आंध्र प्रदेश से न्याय करने की बात कह रहे हैं, हमें हमारा अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है।’ इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर आंध्र और तमिलनाडु की पार्टियों के हंगामे के चलते लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। बता दें कि आंध्र में सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने विशेष राज्य के दर्जे को लेकर एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था। इसके बाद पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। इसके बाद से लगातार अब तक सदन में हंगामे के चलते कार्यवाही नहीं हो पाई है।

विशेष राज्य के दर्जे पर क्या कहा नायडू ने?

1) हमें अधिकार नहीं दिया जा रहा
– टीडीपी चीफ ने कहा, “आप दूसरे राज्यों को विशेष दर्जा देने के साथ ही इंडस्ट्रियल फायदे भी दे रहे हैं। लेकिन, आंध्र प्रदेश को ये दर्जा नहीं दिया जा रहा है। क्यों? ये हमारा अधिकार है। आप संसद में चर्चा नहीं कर रहे हैं। क्यों? हमें हमारा अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा है?”

2) 2022 तक टॉप थ्री में आना आंध्र का लक्ष्य
– “हमारा लक्ष्य 2022 तक आंध्र प्रदेश को देश के तीन टॉप थ्री राज्यों में लाना है। इसके बाद हम 2029 तक आंध्र को इंडिया के टॉप मोस्ट राज्य बनाएंगे। आंध्र प्रदेश अकेला राज्य है जो केंद्र सरकार के बाद स्किल डेवलपमेंट के लिए सहयोग कर सकता है।”

3) हक की बात कर रहे हैं
– उन्होंने कहा, “हम आंध्र प्रदेश के लिए इंसाफ मांग रहे हैं। हम केवल निश्चित समय के लिए विशेष राज्य का दर्जा चाह रहे हैं, ताकि राज्य का विकास किया जा सकते। कृपया हमें तब तक के लिए मोहलत दीजिए, जब तक हमारा राज्य दक्षिण के दूसरे राज्यों के बराबर ना हो जाए।”

अविश्वास प्रस्ताव पर क्या स्थिति है?
– आंध्र की पार्टियों के हंगामे के चलते संसद में लगातार तीसरे दिन अविश्वास प्रस्ताव पर विचार नहीं हो पाया। मंगलवार को भी स्पीकर सुमित्रा महाजन ने हंगामे के चलते अविश्वास प्रस्ताव पर विचार से इनकार कर दिया।

आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं?
– वित्त मंत्री जेटली का कहा था, “14वें वित्त आयोग के बाद अब यह दर्जा नॉर्थ-ईस्ट और पहाड़ी राज्यों के अलावा किसी और को नहीं मिल सकता है। आंध्र पोलवरम योजना और अमरावती के लिए 33-33 हजार करोड़ रुपए मांग रहा है। केंद्र का कहना है कि पोलवरम के लिए 5 हजार करोड़ और अमरावती के लिए ढाई हजार करोड़ रुपए दे चुका है। इसमें गुंटूर,

विजयवाड़ा के लिए 500-500 करोड़ रुपए शामिल हैं।’
– केंद्र के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के अलावा बिहार, ओडिशा, राजस्थान और गोवा की सरकारें केंद्र सरकार से विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही हैं।
– आंध्र का कहना है कि तेलंगाना बनने से प्रदेश का राजस्व घाटा 16 हजार करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, केंद्र के मुताबिक असल घाटा 4 हजार करोड़ का है।

क्या है विशेष राज्य का दर्जा?
– अभी 11 राज्य अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और असम को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। इसमें 90% तक केंद्रीय अनुदान मिलता है। बेहद दुर्गम इलाके वाला पर्वतीय क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा, प्रति व्यक्ति आय और राजस्व काफी कम आदि विशेष दर्जे की शर्तें हैं।

इस अविश्वास प्रस्ताव में कितना दम?
-संसद में सरकार के खिला‌फ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम सदन के 50 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है।
– टीडीपी नेता सीएम रमेश ने कहा, “हम अलग-अलग पार्टियों के 54 सांसदों से हस्ताक्षर ले आएंगे और फिर प्रस्ताव को और दमदार तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।”
– अगर वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी के सांसद दोनों भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए समर्थन दे दें तो भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, क्योंकि जहां टीडीपी के पास 16 सांसद हैं तो वहीं वाईएसआर कांग्रेस के पास 9 सांसद हैं। दोनों को मिलाकर आंकड़ा सिर्फ 25 पहुंचता है।
– मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के मामले में टीडीपी के साथ कांग्रेस, एआईएमआईएम और लेफ्ट पार्टियां दिख रही हैं। कांग्रेस के पास इस वक्त 48 सीटें हैं। वहीं सीपीआई के पास 9 और एआईएमआईएम के पास भी 1 सीट है।

 सरकार परेशान क्यों नहीं है?
– एनडीए में दल- 56 हैं। कुल 314 सांसद हैं। इसमें बीजेपी के 275 सांसद हैं। इनमें स्पीकर सुमित्रा महाजन भी शामिल हैं।
– लोकसभा में कुल सीट 540 हैं। बहुमत के लिए 271 आंकड़ा चाहिए।
– संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने कहा, “हम हर चीज का सामना करने के लिए तैयार हैं। हमने हमेशा विपक्ष से बैंकिंग अनियमितताओं, विश्वास या अविश्वास प्रस्ताव समेत सभी मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद को चलने में सहयोग करने के लिए कहा है। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी पर पूरे देश को भरोसा है। सदन के पास भी पूर्ण विश्वास है, इसलिए कोई समस्या नहीं है। हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं।”
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