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मुख्य चुनाव आयुक्त ने फिलहाल एक साथ चुनाव की संभावना को खारिज कर दिया

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मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने देश में जल्द ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव किए बिना ऐसा संभव नहीं है। हालांकि, रावत ने यह भी कहा- कई चरणों में यह संभव है। जैसे 11 राज्यों के चुनाव आम चुनाव के साथ कराए जाएं तो किस्तों में ऐसा हो सकता है, बशर्ते जनप्रतिनिधि इसके लिए अपने राज्यों की विधानसभा को भंग करने पर सहमत हो जाएं। रावत ने कहा- बिना कानूनी ढांचा बनाए एक साथ चुनाव संभव नहीं हैं, क्योंकि किसी भी विधानसभा का कार्यकाल आगे बढ़ाने या कम करने के लिए संवैधानिक बदलाव जरूरी है।

दो साल में कहां चुनाव
लोकसभा चुनाव : 2019
मध्य प्रदेश : दिसंबर 2018
राजस्थान : दिसंबर 2018
छत्तीसगढ़ : दिसंबर 2018
मिजोरम : दिसंबर 2018
ओडिशा : मई 2019
तेलंगाना : मई 2019
आंध्र प्रदेश : मई 2019
सिक्किम : मई 2019
हरियाणा : अक्टूबर 2019
झारखंड : नवंबर 2019
महाराष्ट्र : अक्टूबर 2019
जम्मू-कश्मीर: यहां विधानसभा चुनाव 6 साल में होते हैं। इस लिहाज से अगले चुनावों का समय नवंबर 2020 है। हालांकि, यहां अभी राज्यपाल शासन लगा है और ऐसे में छह महीने के भीतर चुनाव कराना होगा। माना जा रहा है कि राज्य के हालात को देखते हुए राज्यपाल शासन को 6 महीने के लिए और बढ़ा सकते हैं।
मौजूदा समय में एकसाथ चुनाव संभव नहीं : रावत ने कहा, “चुनावों के संचालन के लिए 100 फीसदी वीवीपैट की उपलब्धता भी जरूरी है। इस मसले पर चुनाव आयोग ने खुद 2015 में सुझाव दिए थे। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल और चुनाव अधिकारियों की भी जरूरत पड़ेगी। लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को 24 लाख ईवीएम की जरूरत होगी। यह संख्या केवल आम चुनाव में लगने वाली ईवीएम से दोगुनी ज्यादा है।’

शाह ने लिखा था लॉ कमीशन को खत : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को ‘एक देश-एक चुनाव’ के समर्थन में लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखी। शाह ने लिखा- देश में मौजूदा समय में कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं। इसके चलते न केवल राज्य सरकारों, बल्कि केंद्र सरकार के विकास कार्य भी रुक जाते हैं। काफी पैसा भी खर्च होता है। इसे कम करने के लिए देश में एक चुनाव की जरूरत है।

11 राज्यों के चुनाव एक साथ कराए जाने से भाजपा का इनकार : भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को कहा कि हमने कभी भी 11 राज्यों के चुनाव आम चुनावों के साथ कराए जाने की बात नहीं कही। हमने हमेशा एक देश-एक चुनाव की बात कही। सोमवार को सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया था कि भाजपा करीब 11 राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराने पर जोर दे रही है। ये वो राज्य हैं, जहां भाजपा की सरकार है या फिर वह सत्ता में भागीदार है।

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