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मुस्लिम और जैन समाज के प्रमुखीं ने गले मिलकर देश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल की पेश

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जैन समाज के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती पर निकली सवारी का बुधवार को महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के सामने मुस्लिमों ने जोरदार स्वागत किया। मुस्लिमों और जैन समाज के प्रमुखीं ने गले मिलकर देश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल को फिर साकार किया। दरगाह के सामने इस ऐतिहासिक और गंगा जमुनी तहजीब के मिलन के गवाह देश भर से आए जायरीन और स्थानीय लोग बने।

मुस्लिम और जैन समाज के प्रमुखीं ने गले मिलकर देश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल की पेश

  1. महावीर जयंती के उपलक्ष में निकाले गए जुलूस में सजी झांकियां जैसे ही दरगाह के सामने पहुंची निजाम गेट के बाहर खड़े गरीब नवाज सूफी मिशन सोसायटी के अध्यक्ष जुल्फिकार चिश्ती, सैयद फखर काजमी, एस एफ हसन चिश्ती, पूर्व पार्षद अस्मत बीबी, सूफी साजिद, नईम खान समेत विभिन्न गणमान्य लोगों ने जैन समाज के प्रमुखों की दस्तारबंदी कर और गोटे की माला पहनाकर स्वागत किया।
  2. जैन समाज के नरेश पाटनी और अन्य गणमान्य लोगों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से गले मिलकर मुबारकबाद दी। सबसे अंत में स्वर्ण निर्मित रथ पर सवार होकर पूर्व नगर सेठ रायबहादुर सेठ मूल चंद सोनी के वंशज विनम्र सोनी पहुंचे। दरगाह  के सामने पहुंचते ही जैन समाज के लोगों ने एक दो तीन चार, जैन समाज की जय जयकार और जियो और जीने दो के नारे लगाए।
  3. सोने के रथ पर सवार विनम्र सोनी रथ से नीचे उतरे और मुस्लिम समाज के लोगों ने उनके गले में दस्तार डालकर स्वागत किया। नगर सेठ के वंशज और जैन समाज के प्रमुखजनों में शामिल प्रमोद सोनी ने बताया कि यह रथ डेढ़ सौ साल पुराना है और इसे  राय बहादुर सेठ मूलचंद सोनी ने बनवाया था।
  4. महावीर जयंती के जुलूस के अवसर पर इसे सवारी में शामिल किया जाता है। जुलूस में सबसे आकर्षण का केंद्र यही रथ रहता है। प्रमोद सोनी पिछले कई सालों से स्वयं इस रथ पर सवार होकर चलते थे। सोनी ने बताया कि 3 सालों से रथ की कमान उन्होंने अपने पुत्र विनम्र सोनी को सौंप दी है। वहीं अब इसको लेकर जुलूस में चलते हैं।
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