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यह समुदाय एक हजार साल से जूझ रहा है आज भी इन पर अत्याचार हो रहे हैं- सुप्रीम कोर्ट

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सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने के मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि एससी/एसटी आरक्षण को लेकर 12 साल पुराने फैसले की समीक्षा की जरूरत क्यों है? इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या नहीं, हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। लेकिन यह समुदाय एक हजार साल से जूझ रहा है। आज भी इन पर अत्याचार हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जून में कहा था कि इस मसले पर संवैधानिक बेंच का फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण जारी रहेगा। इस सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा था- सरकारी नौकरियों में प्रमोशन के लिए 2006 के एम नागराज केस में दिए सुप्रीम कोर्ट फैसले को लागू किया जा सकता है। इस फैसले में कहा गया था कि सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए क्रीमी लेयर नियम लागू नहीं होगा।

एससी/एसटी एक्ट पर लोकसभा में बिल पेश : एससी/एसटी समुदाय से जुड़े उत्पीड़न निरोधक कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने बिल लोकसभा में पेश किया। सरकार इसके जरिए एससी/एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को बहाल करना चाहती है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी थी। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस एक्ट में बदलाव किए थे। कोर्ट ने शिकायत के बाद आरोपियों की फौरन गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि किसी भी मामले में गिरफ्तारी से पहले जांच होना लोगों का मौलिक अधिकार है। दलित संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी है। 8 अगस्त को दूसरी बार भारत बंद का आह्वान किया गया है।

250 लोकसभा सीटों पर एससी/एसटी वोटर का असर : लोकसभा में अनुसूचित जाति(एससी) के लिए 84 और अनुसूचित जनजाति(एसटी) के लिए 47 सीटें रिजर्व हैं। 2019 चुनाव को देखते हुए सत्तापक्ष और विपक्ष इसके पक्ष में खड़े हैं। सरकार ने चुनाव से करीब 9 महीने पहले एससी/एसटी एक्ट को लेकर लोकसभा में बिल भी पेश कर दिया। वोटर के लिहाज से देश में करीब 30% एससी/एसटी मतदाता हैं। ये करीब 250 लोकसभा सीटों पर अहम भूमिका निभाते हैं। इस साल के अंत में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव भी होने हैं। यहां इनकी आबादी ज्यादा है।

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