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रॉबर्ट वाड्रा और उनकी 75 वर्षीय मां मौरीन मंगलवार को जयपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश

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मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी 75 वर्षीय मां मौरीन मंगलवार को जयपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए। जैसे ही वे कार्यालय के बाहर पहुंचे, वहां मौजूद उनके समर्थकों ने ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगाए। वाड्रा की मां से ईडी की पूछताछ खत्म हो चुकी है। वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने बीकानेर जिले के कोलायत में 79 लाख में 270 बीघा जमीन खरीदकर तीन साल बाद 5.15 करोड़ में बेच दी। ईडी ने कई बार समन जारी किए तो वाड्रा ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में अपील दायर कर पूछताछ पर सवाल उठाए थे। लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। ईडी का कहना है कि पूछताछ के बाद ही मामले में वाड्रा की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। उधर, वाड्रा ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा- सरकार बदला ले रही है। वह 75 साल की बुजुर्ग को परेशान कर रही है। मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि बदला लेने में यह सरकार कितना नीचे गिर गई है कि एक वरिष्ठ नागरिक को परेशान कर रही है। इस बीच, सोमवार रात प्रियंका गांधी भी उत्तरप्रदेश का दौरा छोड़कर पति रॉबर्ट वाड्रा से मिलने जयपुर पहुंचीं। वहीं, वाड्रा ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि ईश्वर हमारे साथ है। अगर मैंने कुछ गैरकानूनी काम किया है तो इसकी जांच के लिए 4 साल 8 महीने का वक्त क्यों लगा? लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार शुरू होने से महज दो महीने पहले ही यह पूछताछ क्यों हो रही है?

सेना की जमीन थी, इसे बेच नहीं सकते

2007 में वाड्रा ने स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी बनाई। वाड्रा और उनकी मां मौरिन कंपनी की डायरेक्टर बनीं। बाद में कंपनी का नाम स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड लायबिलिटी कर दिया गया। रजिस्ट्रेशन के वक्त बताया गया था कि ये कंपनी रेस्टोरेंट, बार और कैंटीन चलाने जैसे काम करेगी।  वाड्रा की कंपनी ने 2012 में कोलायत क्षेत्र में 270 बीघा जमीन 79 लाख रुपए में खरीदी। आरोप है कि यह बीकानेर में भारतीय सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज की जमीन थी। इस जमीन के कुछ हिस्से पर विस्थापित लोगों को बसाया गया था, लेकिन उनमें से कुछ ने फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर जमीन वाड्रा की कंपनी को बेच दी, जबकि सेना की जमीन बेची नहीं जा सकती। बाद में वाड्रा की कंपनी ने यह जमीन पांच करोड़ रुपए में बेची। ईडी ने इस मामले में कुछ स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी है।

वसुंधरा सरकार ने शुरू कराई जांच
2013 में राजस्थान में भाजपा सरकार बनी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस जमीन सौदे की जांच शुरू कराई। 2014 में जमीन सौदों को लेकर केस दर्ज किया गया। कुल 16 मामले दर्ज कराए गए। इनमें से चार मामलों में वाड्रा की कंपनी जुड़ी है। बाद में राज्य सरकार ने मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने 31 अगस्त 2017 को आईपीसी की धारा 420, 461, 478 व 471 के तहत मामला दर्ज किया।

जमीन खरीदने वाली कंपनी और कांग्रेस विधायक के भाई पर भी शक
2015 में मनी लांड्रिंग से जुड़े इस मामले की जांच ईडी ने शुरू की। जांच एजेंसी को वाड्रा की कंपनी से जमीन खरीदने वाली कंपनी एलजेनी फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड पर भी शक है। जमीन खरीदने के लिए इस कंपनी ने भूषण पावर और स्टील से करीब साढ़े पांच करोड़ का कर्ज लिया था। बाद में सरकार ने भूषण स्टील को 500 करोड़ रुपए के विभिन्न करों से राहत दे दी। जमीन की सौदेबाजी में कांग्रेस के एक विधायक के भाई महेश नागर की भूमिका पर भी शक है। महेश के करीबी अशोक कुमार ने कंपनी के लिए कोलायत में जयप्रकाश से जमीन के सौदे किए थे। अशोक और जयप्रकाश को गिरफ्तार भी किया गया।

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