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संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल 38वें दिन भी जारी, आंदोलनकारियों से काम पर लौटने की अपील की

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अल्टीमेटम के बावजूद संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल 38वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों के रुख को देखते हुए एनआरएचएम बैकफुट आ गया है और उसेन आंदोलनकारियों से काम पर लौटने की अपील की है। वहीं कमर्चारियों का कहना है कि भूखे पेट परिवार का गुजारा संभव नहीं है, मांगे नहीं मानी जाने तक हड़ताल जारी रहेगी। एनआरएचएम ने मंगलवार शाम तक संविदाकर्मियों को काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया था। बता दें कि इसके पहले भी दो बार एनआरएचएम नोटिस दे चुकी है।

1) स्वास्थ्य मंत्री की अपील, काम पर लौट आएं कर्मचारी

– प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने स्वास्थ्य कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है। सिंह ने कहा कि कर्मचारियों के अप्रेजल के मामले में सीएम से चर्चा हुई है। कर्मचारी काम पर लौट आएं, उनकी मांगों और समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके नहीं लौटने से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं।

2) संविदा कर्मचारियों का जवाब : भूखे पेट नहीं होता काम

– मंत्री की अपील के जवाब में स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि हम अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि भूखे पेट परिवार का गुजारा संभव नहीं है। हम कम वेतन में कब तक और क्यू काम करें। सरकार चाहे तो हमें निकाल दे, लेकिन हमारी मांगें पूरी होने के बाद ही आंदोलन खत्म होगा।

3) संविदाकर्मी बोले, सरकार के पास हमें देने के लिए रुपए नहीं इसलिए मांग रहे भीख
– इंदौर में आंदोनलकारी भीख मांगने के लिए सड़क पर भी उतर चुके हैं। भीख मांगकर विरोध जताने के सवाल पर उनका कहना था कि हम एक महीने से ज्यादा समय से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आ रहा है। सरकार के पास हमें देने के लिए रुपए नहीं हैं, इसलिए भीख मांग रहे हैं। ये रुपए हम सरकार को देंगे।

4) क्या मायने रखते हैं संविदाकर्मी
– मप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था आंदोलन कर रहे ढाई लाख संविदाकर्मियों के जिम्मे है।
– इनके हड़ताल पर जाने की वजह से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कई सेवाएं ठप हो गई हैं।
– किसी भी जांच के लिए मरीज के परिजनों को स्वास्थ्यकर्मी का जिम्मा उठाना पड़ रहा है।
– कुछ अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नर्सिंग कर रहे स्टूडेंट से काम लिया जा रहा है।
– शहरी क्षेत्रों में तो वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्टाफ नहीं होने से लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
– यदि इन्हें काम से निकाला गया तो सरकार को तत्काल अस्पतालों के लिए नई व्यवस्था करनी होगी।
– गर्मी के साथ ही आने वाले दिनों में टीकाकरण के साथ ही सरकार की कई स्वास्थ्य योजनाएं संचालित होने वाली हैं ऐसे में स्टाफ की जरूरत होगी।
– इसके अलावा ढाई लाख स्वास्थ्यकर्मियों के वोटों को देखा जाए तो एक के पीछे चार लोग हो सकते हैं ऐसे में इनके करीब 10 लाख वोट हैं, जो नाराज होने पर सरकार से दूर जा सकते हैं।

5) संविदा कर्मचारियों की ये हैं मांग
– नियमितिकरण के साथ ही अप्रेजल प्रक्रिया बंद करने और निष्कासित संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को बहाल किया जाए।
– संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खाली पदों पर संविलियन करें।
– समान वेतनमान किया जाए।

6) 19 मार्च से कर रहे आंदोलन
– संविदा स्वास्थ्यकर्मी 19 मार्च से सामूहिक हड़ताल पर हैं। वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अब तक वे रैली, धरना, फांसी, जल सत्याग्रह, बर्तन बजाना, सीटी बजाना, काली पट्टी बांधना, चुनरी यात्रा निकालना, भीख मांगना, अर्थी निकालना जैसे प्रदर्शन किए हैं। सरकार द्वारा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है।
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