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सीधी सीट से सीनियर विधायक केदारनाथ शुक्ला ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर टीका-टिप्पणी कर दी

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भाजपा में झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद सियासी अनबन बढ़ गई है। सीधी सीट से सीनियर विधायक केदारनाथ शुक्ला ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर टीका-टिप्पणी कर दी, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। साथ ही उनसे पूछा है कि उन्होंने यह बयान क्यों दिया। शुक्ला के बयान के बाद प्रदेश संगठन ने आनन-फानन में देर रात प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। प्रदेश महामंत्री और सांसद वीडी शर्मा ने इसमें कहा कि शुक्ला का बयान अनुशासनहीनता है। राकेश सिंह ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।  बताया जा रहा है कि गुरुवार को ही परिणाम आने के बाद शाम को शुक्ला ने कह दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष एक जिम्मेदार पद पर बैठे हैं, लेकिन इस पद के अनुरूप कार्य का बखूबी निर्वहन नहीं कर पा रहे। वे असक्षम हैं। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व से मांग है कि उन्हें पद से हटा दिया जाए या इस्तीफा ले लिया जाए। बाद में जो भी बाते हैं, वह केंद्रीय नेतृत्व को बता दी जाएगी। शुक्ला ने यह भी कहा कि राकेश सिंह ने आने के बाद पार्टी चौपट कर दी। इस बयान की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को मिली तो हाईकमान के कहने के बाद शुक्ला को नोटिस जारी कर दिया गया।

शुक्ला का बयान भाजपा की रीति-नीति के खिलाफ 
वीडी शर्मा ने कहा कि शुक्ला ने जो कहा है वह पार्टी की रीति-नीति के तहत नहीं आता। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर अक्षमता के जो आरोप लगाए हैं, उसके संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के उपरांत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सात दिन में नोटिस का जवाब आने पर पार्टी आगामी कार्यवाही करेगी, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में ही हमने अभी कुछ दिन पहले ही लोकसभा चुनाव में 29 में से 28 सीटें जीती हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि उपचुनाव भाजपा न हारी हो, इससे पहले भी सत्ता में रहते उपचुनावों में हार मिली है। शर्मा ने कहा कि पार्टी में सभी निर्णय सामूहिक होते हैं, इसलिए जीत भी सामूहिक होती है और हार भी सामूहिक। झाबुआ उपचुनाव में प्रत्याशी चयन से लेकर अन्य सभी निर्णय राकेश सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सामूहिक तौर पर ही लिए थे। इसीलिए शुक्ला के बयान को पार्टी ने गंभीरता से लिया है। पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने शुक्ला के बयान पर कहा कि राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र और अराजकता में फर्क होता है। शुक्ला ने जो कहा है, वह अराजकता की श्रेणी में आता है। यह कांग्रेस नहीं, जो सब चल जाएगा। यह भाजपा है, जिसमें अनुशासन भी है। इधर, नतीजों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार को लेकर जनता में आक्रोश है। वह सरकार में विफल भी रही, लेकिन हम इसे जनता तक नहीं पहुंचा पाए। इसकी समीक्षा करेंगे। जनता का फैसला शिरोधार्य है। इसके बाद भी पार्टी दोगुनी ताकत से जनता तक कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफी को पहुंचाएगी। झाबुआ के चुनाव में कांग्रेस सरकार ने अफसरों के साथ सरकारी तंत्र का भरपूर उपयोग किया। कांग्रेस की यह परंपरागत सीट रही है। पिछले बार कांग्रेस के बागी उम्मीदवार के खड़े होने से भाजपा को जीत हासिल हुई थी।

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