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सीबीएसई ने मंगलवार को 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी, परसेंटेज 86.70% रहा, जो पिछले साल से 4.25% कम

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सीबीएसई ने मंगलवार को 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी कर दिया। इस साल पासिंग परसेंटेज 86.70% रहा, जो पिछले साल से 4.25% कम है। लगातार तीसरे साल 10वीं के नतीजों में गिरावट दर्ज की गई। इस साल लड़कियों ने फिर बाजी मारी, उनका पासिंग परसेंटेज 88.67% रहा, जबकि 85.32% लड़के पास हुए। जानिए सीबीएसई 10वीं के रिजल्ट में इस बार क्या खास रहा।

#1. नतीजों में लगातार तीसरे साल गिरावट

– इस साल ओवरऑल पासिंग परसेंटेज 86.70% रहा, जो पिछले साल से 4.25% कम है। ये लगातार तीसरा साल है, जब 10वीं क्लास का पासिंग परसेंटेज गिरा है। 2017 में पासिंग परसेंटेज 90.95%, 2016 में 96.21% औक 2015 में 98.64% रहा था।

#2. लड़कियों ने फिर मारी बाजी

– इस साल लड़कियों ने बाजी मारी। पिछले साल लड़कियां लड़कों से पीछे थीं। इस साल लड़कियों का पासिंग परसेंटेज 88.67% रहा, 85.32% लड़के पास हुए। लड़कों के मुकाबले लड़कियों का पासिंग परसेंटेज 3.35% बढ़ा है। पिछले साल 92.05% लड़कियां और 93.04% लड़के पास हुए थे। 2016 में 96.36% लड़कियां और 96.11% लड़के पास हुए थे।

#3. पहली बार लड़के-लड़कियों के पासिंग परसेंटेज में बड़ा अंतर

– पिछले 5 साल के आंकड़ों को देखा जाए तो ये पहली बार है, जब लड़के-लड़कियों के पासिंग परसेंटेज में 3.35% का अंतर रहा। जबकि 2013 से 2017 तक पासिंग परसेंटेज में लगभग 1% का ही अंतर रहता था।

#4. चार ने किया टॉप, जिनमें से 3 लड़कियां

– चार स्टूडेंट्स ने टॉप किया, जिनमें से 3 लड़कियां हैं। इन सभी को 500 में से 499 नंबर मिले। इस साल गुड़गांव के प्रखर मित्तल, बिजनौर की रिमझिम अग्रवाल, शामली की नंदिनी गर्ग और कोचीन की श्रीलक्ष्मी ने टॉप किया।

#5. 10वीं-12वीं के नतीजों में यूपी का दबदबा

– सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड के रिजल्ट में उत्तर प्रदेश के स्टूडेंट्स का दबदबा रहा। 12वीं में जहां गाजियाबाद की मेघना श्रीवास्तव (499/500) लाकर टॉप किया था, वहीं 10वीं में टॉप करने वाले 4 स्टूडेंट्स में दो (रिमझिम अग्रवाल और नंदिनी गर्ग) भी उत्तर प्रदेश की हैं। इसके साथ ही टॉप-3 पोजिशन पर 25 स्टूडेंट्स में से 12 उत्तर प्रदेश के हैं।

#6. टॉप-3 पोजिशन पर 25 छात्र, इनमें 17 लड़कियां

– 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में टॉप-3 पोजिशन पर 25 स्टूडेंट्स रहे। इनमें पहली रैंक पर 4, दूसरी रैंक पर 7 और तीसरी रैंक पर 14 स्टूडेंट्स हैं। इनमें से पहली रैंक में ही 4 में से 3 लड़कियां, ओवरऑल टॉप-3 पोजिशन पर 25 में से 17 लड़कियां हैं।

#7. सरकारी स्कूलों का रिजल्ट खराब, प्राइवेट स्कूल तीसरे नंबर पर

– सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सबसे खराब रहा। 63.97% स्टूडेंट्स ही पास हुए। सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का रिजल्ट 73.46% रहा। सबसे ज्यादा 97.31% रिजल्ट जवाहर नवोदय विद्यालय का और फिर 95.96% रिजल्ट केंद्रीय विद्यालयों का रहा। तीसरे नंबर पर प्राइवेट स्कूल रहे, जहां से 89.49% स्टूडेंट्स पास हुए।

#8. तिरुवनंतपुरम इस साल भी टॉप पर, चेन्नई दूसरे नंबर पर

– सबसे ज्यादा 99.60% रिजल्ट केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम का रहा। 97.37% के साथ चेन्नई दूसरे नंबर पर और 91.86% के साथ अजमेर तीसरे नंबर पर है। पिछले साल भी तिरुवनंतपुरम पहले नंबर पर था, जहां का रिजल्ट 99.85% रहा था। 2017 में दूसरे नंबर चेन्नई (99.62%) और तीसरे नंबर पर इलाहाबाद (98.23% ) था।

#9. दिव्यांग छात्रों का रिजल्ट 92.55% रहा

– दिव्यांग स्टूडेंट्स का पासिंग परसेंटेज 92.55% रहा, जो पिछले साल की तुलना में 3.15% बढ़ा है। इस साल गुड़गांव के सनसिटी स्कूल की अनुष्का पांडा ने 500 में से 489 नंबर हासिल कर टॉप किया है। जबकि दूसरे नंबर पर गाजियाबाद के उत्तम स्कूल की सानिया गांधी (489/500) और ओड़िशा के जवाहर नवोदय विद्यालय के सौम्या दीप प्रधान (484/500) तीसरे नंबर पर रहे।

#10. 27 हजार से ज्यादा छात्रों के 95% मार्क्स

 – 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में इस साल 1,31,493 स्टूडेंट्स ने 90% या उससे ज्यादा मार्क्स हासिल किए हैं, जबकि 95% या उससे ज्यादा मार्क्स हासिल करने वाले सिर्फ 27,476 स्टूडेंट्स ही हैं। इस साल 1,86,067 स्टूडेंट्स को कंपार्टमेंट आई है, जो ओवरऑल स्टूडेंट्स का 11.45% है।
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