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स्वास्थ्य विभाग पोलिया वायरस पर अंकुश लगाए रखने के लिए गंभीर

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अाज विश्व पोलियो दिवस है। अथक प्रयासों के बाद पांच बरस पहले भारत को पोलियो मुक्त का सर्टिफिकेट मिल चुका है। हेल्थ विभाग की सर्विलांस टीमें बच्चों को पोलियो मुक्त बनाए रखने और सीमा पार से पोलियो वायरस के खतरे को रोकने को लेकर अलर्ट हैं। दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो के केस मिलते रहे हैं। ऐसे में सरकारी एजेंसियों को अंदेशा रहता है कि पड़ोसी देश से आतंकी घुसपैठ के साथ पोलियो वायरस फैल सकता है। जरा सी ढील के कारण भविष्य निर्माता या बच्चे वायरस की चपेट में आकर पैरालाइज्ड या दिव्यांग हो सकते हैं। दिव्यांगता पर अंकुश लगाए रखने काे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को सचेत करते हुए तुरंत सर्विलांस बढ़ाने की हिदायत दी है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 के मुकाबले पाकिस्तान में पोलियाे पॉजिटिव केसों की संख्या छह गुना तक बढ़ गई है। पहले जहां 12 केस थे वहीं 15 अक्टूबर तक 72 केसों की पहचान हो चुकी है। अफगानिस्तान ने सर्विलांस के साथ इम्नाइजेशन सिस्टम मजबूत किया। वहां पिछले साल 21 केस थे जबकि इस बार 16 पोलियो पॉजिटिव केस हैं। दुनियाभर में इन दोनों देशों के अलावा कहीं भी पोलियो वायरस ग्रस्त बच्चा नहीं है। इसलिए इन देशों की सीमा से सटे देशों को हाई अलर्ट कर दिया है, जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग को नये दिशा-निर्देश जारी हुए हैं।

वायरस कंट्रोल के लिए उठाए कदम

  • सर्विलांस या निगरानी बढ़ा दी। हाई रिस्क एरिया में बस्ती, झुग्गी-झोपड़ी, घुमंतू वर्ग, ईंट-भट्ठे व जहां-जहां रहता है गरीब तबका शामिल है।
  • जहां एएनएम छुट्टी पर हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग और सतर्क रहेगा। टीकाकरण अधिक होगा। ओपीवी-आईपीवी वैक्सीनेशन हर बच्चे को मुहैया करवा रहे हैं।
  • फैक्ट्री, जेल, फुटपाथ या ओवरब्रिज के नीचे रहने वाले बच्चों को चिह्नित कर वैक्सीन मुहैया होगी।

प्रयास : हजारों से लाखों बच्चों की मॉनिटरिंग हुई
, यह उसकी सर्विलांस सिस्टम से पता लगता है। वर्ष 2011 के बाद देश में कहीं भी पोलियाे ग्रस्त केस सामने नहीं आया। 2014 में देश को पोलियो मुक्त का सर्टिफिकेट भी मिला। लेकिन पाकिस्तान व अफगानिस्तान में वायरस की सक्रियता देखकर भारत सहित उनसे सटे देशों ने मॉनिटरिंग के साथ इम्युनाइजेशन सिस्टम में परिवर्तन करके उसे और व्यापक बनाया। हजारों की बजाए अब लाखों बच्चों के स्वास्थ्य की जांच होती है। इसके साथ ही पी 1 और पी 3 वायरस से डबल सुरक्षा के तहत ओपीवी की खुराक और आईपीवी इंजेक्शन लगाया जाता है। बच्चों को अन्य बीमारियों से बचाने के लिए इम्युनाइजेशन सिस्टम में सुधार किया है। जिला सिविल अस्पताल के प्रोग्राम अधिकारी डॉ. तरूण ने बताया कि जिस किसी एरिया में 15 साल से कम उम्र के बच्चे में अपंगता जैसे चलने-फिरने में असमर्थता, कमजाेरी, हाथ-पैरों का ढीला होना, इन अंगों का काम न करने का केस मिलता है तो स्वास्थ्य टीम वहां पहुंचकर जांच करती है। पीड़ित बच्चे के स्टूल का सैंपल लेकर एएफपी टेस्ट के लिए नॉर्थ इंडिया की लैब कसौली में भेजा जाता है। वहां से एक माह बाद रिपोर्ट आती है। तब तक केस को पॉजिटिव मानते हैं। उसके आसपास के 50 बच्चों को फिर से पोलियो की खुराक दी जाती है। इसे रिंग इम्युनाइजेशन कहा जाता है, ताकि वायरस सक्रिय न रहे और अन्य बच्चे चपेट में न आए।

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