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22 साल का नीरज तिवारी 57 दिन से बेहोश है, नीरज की देखभाल मां, पिता या भाई नहीं, बल्कि दोस्त कर रहे हैं

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सड़क हादसे में घायल 22 साल का नीरज तिवारी 57 दिन से बेहोश है। एक निजी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती नीरज की देखभाल मां, पिता या भाई नहीं, बल्कि दोस्त कर रहे हैं। अस्पताल और दवा स्टाेर का बिल भी दोस्त चुका रहे हैं। डेढ़ महीने में युवकों ने अस्पताल में डेढ़ लाख रुपए चंदा करके जमा किए हैं। दोस्तों की जिद नीरज को स्वस्थ देखने की है।
तीमारदारी में जुटे रोहित तिवारी ने बताया कि उनकी दोस्ती 15 साल पुरानी है। हायर सेकंडरी तक की पढ़ाई एक साथ हुई। नीरज ने बीकॉम में एडमिशन लिया और मैंने ट्रैवल एजेंसी शुरू कर दी। लेकिन, स्कूल में साथ पढ़े 8 दोस्तों का साथ कभी नहीं छूटा। 2 दिसंबर को जब नीरज के एक्सीडेंट की खबर मिली, उस समय ग्रुप के पांच दोस्तों ने उसे होशंगाबाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

यहां दो दिन चले इलाज से आराम नहीं मिला। नीरज की बेहोशी नहीं टूटी, बल्कि हालत बिगड़ गई। नीरज के पिता और भाई से बात कर उसे पालीवाल अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट किया। इलाज से नीरज वेंटिलेटर से तो बाहर आ गया, लेकिन होश अब तक नहीं अाया है। वे बताते हैं कि 8 दोस्तों ने चंदा करके अब तक डेढ़ लाख रुपए नीरज के इलाज पर खर्च किए हैं। हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. जेपी पालीवाल ने बताया कि इलाज खर्च का बिल उसके दोस्तों द्वारा जमा किए जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बिल में एक लाख का डिस्काउंट किया है।

शुरुआत में ही जमापूंजी खत्म

मौसेरे भाई विशाल तिवारी ने बताया कि इलाज लंबा खिंचने के कारण मौसा-मौसी होशंगाबाद चले गए। घर खर्च चलाने का जिम्मा नीरज पर था। वह एक प्राइवेट कंपनी में कलेक्शन एजेंट का काम करते थे। लेकिन, हादसे के बाद शुरुआती इलाज में ही परिवार की जमा पूंजी खर्च हो गई। इलाज के लिए अस्पताल में 3 लाख रुपए जमा कर चुके हैं। इतनी ही कीमत की दवाएं नीरज को लग चुकी है।

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