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कर्नाटक में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है

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  • कर्नाटक में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। इस बीच जिक्र रेड्डी बंधुओं का भी हो रहा है। जब रेड्डी बंधुओं के बारे में बात होती है तो नाम आता है बेल्लारी का। ये वही जिला है जो एक वक्त में काली कमाई का गढ़ माना जाता था। जिसकी धुरी में रेड्डी बंधु थे। ऐसे में बताते हैं कि कर्नाटक की राजनीति में रेड्डी बंधु कौन हैं और किस तरह से बेल्लारी काली कमाई का गढ़ बन गया।

    – बेल्लारी में देश का करीब 25 प्रतिशत लौह अयस्क भंडार है। यहां का लौह अयस्क अच्छी क्वालिटी का माना जाता है। इसमें 60 से 65 प्रतिशत तक लोहा होता है। एक अनुमान के मुताबिक बेल्लारी में करीब 99 लौह अयस्क माइन्स हैं।

    चीन से बढ़ी लौह अयस्क की मांग
    साल 1994 तक बेल्लारी में कुछ सरकारी कंपनियां ही थीं। बाद में सरकार ने प्राइवेट ऑपरेटर्स को माइनिंग का लाइसेंस दे दिया। इधर चीन ने लौह अयस्क की मांग बढा दी। जिसके चलते साल 2000 से 2008 के बीच वर्ल्ड मार्केट में लौह अयस्क की कीमत करीब तीन गुना बढ़ गई। भारत लौह अयस्क के बड़े एक्सपोटर्स में शामिल हो गया। सरकार ने लौह अयस्क खनन में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की परमीशन दे दी।

    बेल्लारी में आने लगीं प्राइवेट कंपनियां
    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ने से बेल्लारी में प्राइवेट कंपनियों को होड़ लग गई। राजनीति और ऊंची पहुंच के हिसाब से लाइनेंस मिलने लगे। कहा जाता है कि इससे कर्नाटक की राजनीति भी प्रभावित हुई। प्राइवेट कंपनियों और नेताओं की बीच खनन को लेकर बड़ी से बड़ी डील होने लगी। मीडिया में बेल्लारी को नया गणतंत्र कहा जाने लगा।
    – जुलाई 2010 में तत्कालीन सीएम बीएस येदियुरप्पा ने विधानसभा में माना कि साल 2003 से 2010 के बीच प्रदेश में 3 करोड़ टन लौट अयस्क का अवैध तरीके से निर्यात हुआ। जिसकी कीमत करीब 7500 करोड़ रुपए थी।

    रेड्डी बंधुओं का प्रवेश
    अवैध खनन में रेड्डी बंधुओं यानी जी. करुणाकर रेड्डी, जनार्दन रेड्डी और सुधारक रेड्डी ने भी खूब पैसे कमाए। इन भाईयों की चर्चा साल 1999 में हुई। तब लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने बेल्लारी और अमेठी दो जगहों पर चुनाव लड़ा। उनके खिलाफ बेल्लारी से बीजेपी नेता सुषमा स्वराज थीं। तब सुषमा स्वराज हार गईं थीं। चुनाव में सुषमा स्वराज के पक्ष में जनार्दन रेड्डी समेत तीनों भाईयों ने चुनाव प्रचार किया था।
    – 90 के दशक में रेड्डी ने चिट फंड बिजनेस की शुरुआत की थी। तब कंपनी नाकाम रही थी, इसके बाद रेड्डी ने खनन की दुनिया में ठेकेदारी का काम शुरू कर दिया फिर आगे ही बढ़ता गया। धीरे-धीरे रेड्डी बंधु कर्नाटक की राजनीति में अंदर तक घुस गए।

    कब खुली रेड्डी बंधुओं की पोल?
    सुप्रीम कोर्ट के रिटार्ड जज जस्टिस संतोष हेगड़े कर्नाटक के लोकायुक्त रह चुके हैं। उन्होंने ही 2007 में रेड्डी के अवैध खनन की जांच की थी। जिसके बाद साल 2011 में रिपोर्ट सौंपी। जिसमें बताया कि अवैध खनन से सरकार को 161 अरब रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में नेताओं और कॉर्पोरेट घरानों के बीच साठगांठ की बात भी सामने आई। एक अनुमान के मुताबिक अवैध खनन करने वाले माफिया हर दिन 12 से 20 करोड़ रुपए तक की कमाई कर रहे थे।
    – रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कर्नाटक के मंत्री जी जनार्दन रेड्डी ने बड़ी स्टील कंपनी को फायदा पहुंचाया है। उन पर अवैध खनन के संरक्षण देने का आरोप लगा। बता दें कि जब खनन स्कैंडल सामने आया तो तीन में से दो भाई राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री थें।
    – 5 सितंबर 2011 को जनार्दन रेड्डी को सीबीआई ने अरेस्ट कर लिया। बाद में 21 जनवरी 2015 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।

    तीन जज भी हुए अरेस्ट
    गिरफ्तारी के बाद रेड्डी ने बेल के लिए काफी कोशिश की। कहा जाता है कि रेड्डी ने जजों तक को रिश्वत दी। इसी मामले में तीन जजों से पैसे जब्त कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसे कैश फॉर बेल स्कैम कहा गया।

    कर्नाटक चुनाव को प्रभावित करने का आरोप
    कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने रेड्डी बंधुओं के करीबियों को टिकट बांटा है। बता दें कि जमानत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनार्दन रेड्डी को बेल्लारी जिले में न घुसने का आदेश दिया था।

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