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योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह राजधानी के हजरतगंज थाने का इंस्पेक्शन किया

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योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह राजधानी के हजरतगंज थाने का इंस्पेक्शन किया। योगी ने एक विंग से दूसरी विंग तक चेकिंग की। यहां योगी ने सीनियर पुलिस ऑफिसर्स से बातचीत भी की। साथ ही यह समझने की कोशिश भी की कि डिपार्टमेंट काम कैसे करता है। जाते-जाते योगी ने कहा कि यह उनका आखिरी दौरा नहीं है। सारे डिपार्टमेंट में दौरे किए जाएंगे। इसके बाद योगी एनेक्सी के लिए रवाना हो गए। उधर, एनवॉयर्नमेंट मिनिस्टर उपेंद्र तिवारी ने गुरुवार को अपने ऑफिस में खुद ही झाड़ू लगाई।
– योगी ने सीएम बनते ही अफसरों और मंत्रियों को साफ-सफाई के ऑर्डर दिए हैं। जैसे ही हजरतगंज थाने को सीएम के पहुंचने की सूचना मिली, आनन-फानन में वहां साफ-सफाई कराई गई।
– थाने के बाहर फर्श की धुलाई की गई और फाइलों से धूल हटाई गई।
– इस दौरान सीएम के साथ डीजीपी जावीद अहमद, एसएसपी मंज‍िल सैनी समेत कई ऑफिसर्स मौजूद रहे।
एनवॉयर्नमेंट मिनिस्टर ने दफ्तर में खुद लगाई झाड़ू
– यूपी सरकार के मंत्रियों को बुधवार को मंत्रालय अलॉट कर दिए गए। इसके बाद सभी मंत्री अपने-अपने ऑफिस गुरुवार सुबह वक्त से पहले पहुंच गए।
– एनवॉयर्नमेंट मिनिस्टर उपेंद्र तिवारी अपने दफ्तर में गंदगी देख काफी नाराज हुए। उन्होंने अफसरों को ऑर्डर देने के पहले खुद ही झाड़ू उठा ली और रूम को साफ करने लगे।
– उन्होंने यहां का हाल जाना और ऑफिस में फैसिलिटीज बढ़ाने के ऑर्डर दिए। साथ ही दिनेश शर्मा ने सेक्रेटरिएट के पब्लिक टॉयलेट्स की भी जांच की।
सरकारी दफ्तरों में गुटखा-पान के इस्तेमाल पर रोक
– बता दें कि सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अफसरों के साथ पहली मीटिंग में ही उन्हें स्वच्छता शपथ दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बुधवार को सेक्रेटरिएट का दौरा किया।
– इसी के बाद उन्होंने सरकारी दफ्तरों में गुटखा-पान और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऑर्डर दिया है।
कौन हैं उपेंद्र तिवारी?
– उपेंद्र तिवारी बलिया के फेफना विधानसभा सीट से विधायक हैं।
– वे 2 बार इस सीट से जीत चुके हैं। दोनों ही बार उन्होंने एसपी के सीनियर ली‍डर अंबिका चौधरी को हराया था।
– यहां से चुनाव जीतने के बाद उन्हें योगी सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है।
यूपी में योगी सरकार बन गयी है। 44 मंत्रियों सहित 1 सीएम और दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं, लेकिन अब आने वाले दिनों में कुछ बड़े बदलाव भाजपा में दिखाई देंगे।  पॉलिटिकल एक्सपर्ट श्रीधर अग्निहोत्री और योगेश श्रीवास्तव से इस बदलाव को लेकर बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि अब सरकार के साथ साथ भाजपा के संगठन में 3 बड़े बदलाव होंगे।
केशव मौर्य छोड़ सकते हैं यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद
– बीजेपी में यह पुरानी परंपरा रही है कि जब संगठन में किसी पद पर बैठे व्यक्ति को सरकार में जिम्मेदारी दी जाती है तो उसे पुराना पद छोड़ना पड़ता है।
– यही राजनाथ सिंह के साथ भी हुआ था, जब 2014 में राजनाथ सिंह ने सरकार में गृह मंत्री का पद संभाला तो उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था।
– अब डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी बीजेपी के अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं।
– सूत्रों की माने तो बीजेपी अब अध्यक्ष पद के लिए पश्चिम से किसी चेहरे को तलाश रही है। जो नए सिरे से संगठन और सरकार में तालमेल बनाकर चले।
6 महीने के अन्दर इन 5 चेहरों को जाना होगा विधानसभा या विधानपरिषद
– बीजेपी सरकार में 5 चेहरे ऐसे हैं जो किसी न किसी पद पर बैठे हैं, लेकिन ये चेहरे ना तो विधानसभा के सदस्य हैं न ही विधानपरिषद के सदस्य हैं।
– ये चेहरे हैं सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और मंत्री मोहसिन रजा।
– अब 6 महीने के भीतर इन्हें विधानसभा का सदस्य बनना होगा या फिर विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा। तभी यह सरकार में किसी पद पर रह सकते हैं।
– चूंकि 5 मई 2018 को ही विधानपरिषद की 13 सीट खाली हो रही है। जिसमें अभी साल भर से ज्यादा का समय है।
– ऐसे में बीजेपी अपने कुछ विधायकों से इस्तीफा देने का आग्रह कर सकती है, ताकि उन पांच सीटों पर ये चेहरे चुनाव लड़ कर विधानसभा की सदस्यता ले सकें।
– अब कयास यह लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोगों को पूर्वांचल तो कुछ को बुंदेलखंड से चुनाव लड़ाया जा सकता है, क्योंकि बीजेपी की इन्हीं क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सीटें हैं। अब यह देखना होगा कि कौन विधायक अपनी सीट छोड़ेगा।
– 2002 में भी जब राजनाथ सिंह यूपी के सीएम बने थे तब उन्होंने हैदरगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। तब वहां से जीते हुए विधायक ने उनके लिए सीट छोड़ी थी।
2 लोकसभा, 5 विधानसभा सीट पर होगा उपचुनाव, मेयर भी बदलेगा
– योगी के सीएम बनने के बाद उन्हें गोरखपुर सीट से सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। इसी तरह केशव मौर्य को भी इलाहाबाद की फूलपुर सीट इस्तीफा देना होगा।
– जबकि डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को लखनऊ मेयर पद से इस्तीफा देना होगा।
– लोकसभा की 2 सीटों पर तो उपचुनाव होंगे, जबकि आगामी जुलाई-अगस्त में मेयर पद के चुनाव संभावित हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि लखनऊ नगर निगम में प्रशासक नियुक्त कर दिया जाएगा।
– जबकि, जो पांच विधायक अपनी सीट इन बड़े चेहरों के लिए छोड़ेंगे वहां भी उपचुनाव होगा।
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