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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में पाटीदार समाज के 49 जोड़ों का विवाह सम्पन्न हुआ

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गुजरात में कुछ ही समय पूर्व मेरे बड़े भाई के बेटे का विवाह सम्पन्न होने जा रहा था, उसकी उम्र 17 साल थी। मैंने उसे पुलिस की मदद से रुकवाया। हालांकि परिवार की नाराजगी मुझे झेलनी पड़ी। जब मैं अपने भतीजे का बाल विवाह रुकवा सकती हूं तो प्रदेश में मैं बाल विवाह जैसे अपराध नहीं होने दूंगी। यह बात राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को राजधानी के निकट झरखेड़ा ग्राम में आयोजित पाटीदार समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में कही। उनकी उपस्थिति में पाटीदार समाज के 49 जोड़ों का विवाह सम्पन्न हुआ।

-इस मौके पर उन्होंने कहा कि गुजरात में मैंने नियम में संशोधन कराकर मध्यम लघु परिवार की महिला के नाम जमीन कराई जाती है, उसे पंजीयन शुल्क से मुक्त करवाया। उन्होंने वधुओं से कहा कि वह ससुराल जाकर अपनी ऐसी मिसाल कायम करें कि जिससे ससुराल पक्ष में उन्हें सम्मान और स्थान मिले। राज्यपाल ने बाल विवाह रोकने पर ज्यादा जोर दिया। समारोह में लगभग 8 हजार से अधिक पाटीदार समाज के परिवारों ने भाग लिया।

मंच पर महामंडलेश्वर संत केशवदास जी महाराज, विशेष अतिथि सांसद आलोक संजर, जिला पंचायत अध्यक्ष इंदौर कविता पाटीदार, पूर्व विधायक और कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष शाजापुर नेमीचंद जैन, पूर्व विधायक सुसनेर फूल सिंह बेदिया सहित भोपाल, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़ जिले के पाटीदार समाज के वरिष्ठ जन मौजूद थे।

-विवाह समिति अध्यक्ष ओमप्रकाश पाटीदार और पाटीदार समाज सरदार पटेल समिति के प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ. रमेश माधव ने महामहिम से मांग की कि चार जिलों में लगभग ढाई लाख से अधिक पाटीदार समाज के लाेग हैं। मध्यप्रदेश में तो पाटीदार ओबीसी की श्रेणी में आते हैं, इसके बाद भी उनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बनते हैं। इस संबंध में समाज ने वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अनुरोध किया था, जब वे शुजालपुर पाटीदार छात्रावास शादी समारोह में पहुंचे थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि पाटीदारों के पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र बनाने में कोई अड़चन नहीं आएगी। इसके बाद भी राजस्व अधिकारी घोषणा पर अमल नहीं कर रहे हैं।

 -वर्ष 1984 के रिकाॅर्ड में गुजराती लिखा होने के कारण प्रमाण पत्र अमान्य किये जा रहे हैं। क्योंकि पाटीदार समाज कई वर्ष पहले गुजरात से आया था। समिति ने सामूहिक विवाह को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में जोड़े जाने का अनुरोध भी किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इसे गंभीरता से लिया और उपस्थित जन समुदाय को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा।
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