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पिछली सरकार में धर्म के नाम पर हुए घोटालों की जांच कराई जाएगी – कमलनाथ

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि पिछली सरकार में धर्म के नाम पर हुए घोटालों की जांच कराई जाएगी। वे घोटाले चाहे सिंहस्थ में हुए हों या नर्मदा किनारे पेड़ लगाने के नाम पर किए गए हों। सभी की जांच होगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार और पिछली सरकार में नीयत व नीति का ही फर्क है। हम घोषणाओं से अधिक काम करके दिखाने में भरोसा रखते हैं। कमलनाथ िमंटो हॉल में अध्यात्म विभाग द्वारा अायोजित संत समागम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने संतों की मांग- अाश्रम, मठ-मंदिर व गोशालाओं की भूमि को पट्टे प्रदान करने पर विचार का अाश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जब हम उद्योगोें के लिए भूमि देते हैं तो संतों को भूमि के पट्टे क्यों नहीं दे सकते। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज से 35 साल पहले मैंने संसद में अध्यात्म विभाग बनाने की मांग उठाई थी। मुख्यमंत्री बने के बाद सबसे पहले मैंने अध्यात्म विभाग का गठन किया। यह चिंता का विषय है कि वर्तमान शहरी युवा इंटरनेट व मोबाइल में उलझा है। हमारा और संत समाज का कर्तव्य है कि उसे हम भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से जोड़ें।

आश्वासन… सीएम ने संतों की मांगों को जल्द से जल्द हल करने का वादा किया

  • संतों की पांच मांग
  • पांच साल पुराने कुटिया, अाश्रम, मंदिरों को स्थाई पट्टा दें।
  • वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अायुष्मान कार्ड दें।
  • संतों द्वारा चलाई जा रहीं गोशालाओं को अनुदान दें।
  • गोशालाओं, मंदिरों व संत कुटियों को निर्धारित यूनिट तक बिजली बिल माफ करें।
  • सरकार धार्मिक कार्यों के नीति निर्धारण में संतों की सहभागिता अनिवार्य करे।

9 माह में ही पूरी कीं संतों की मांगें : धर्मस्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार पुजारियों को 15 साल अाश्वासन देती रही, जबकि कांग्रेस सरकार ने 9 माह में ही संतों की मांगें पूरी कर दीं। शर्मा ने बताया कि बड़े मंदिरों के जीर्णोद्वार के लिए 2 करोड़ 45 लाख, रुपए दिए गए हैं। धार्मिक महत्व के मेलों के लिए एक करोड़ 34 लाख की राशि दी गई है।

कम्प्यूटर बाबा ने कहा- खुश हैं संत : नर्मदा ट्रस्ट के अध्यक्ष कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने संतों के पक्ष में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिससे संत समाज खुश है। मठ-मंदिर सलाहकार समिति के अध्यक्ष स्वामी सुबुद्धानंद महाराज ने कहा कि पिछले 9 माह में ही इस सरकार ने संतों की कई समस्याए हल कर दीं, जो सराहनीय है।

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